देहरादून के पास यमुना पर 204 मीटर ऊंचा लखवाड़ बांध बनाने को लेकर बुधवार को केंद्र व 6 राज्‍यों के बीच समझौता हुआ। जनवरी से मई महीने में दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पानी की कमी की समस्या रहती है, ऐसे समय में इस परियोजना से पानी की दिक्कत को दूर करने में मदद मिलेगी. यमुना बेसिन में यमुना नदी पर प्रस्तावित लखवाड़ बहुद्देश्यीय अन्तरराज्यीय परियोजना से अब राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में पानी की किल्लत की समस्या से छूटकारा मिल सकेगा. इसके लिए राजस्थान सहित छह राज्यों उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश एवं दिल्ली के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं.

Lakhwar multipurpose dam project Approved on upper yamuna river basin near dehradun

लखवाड़ परियोजना के लिए छह राज्यों के बीच यह एमओयू जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में हुआ. ऊपरी यमुना बेसिन क्षेत्र में 3966 करोड़ रुपए के खर्च से तैयार होने वाली लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ, राजस्‍थान की मुख्‍यमंत्री वसुन्‍धरा राजे, उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहर लाल, हिमाचल प्रदेश के मुख्‍यमंत्री जयराम ठाकुर और दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हस्ताक्षर किए.

इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री गडकरी ने कहा कि लखवाड़ बहुउद्देश्यीय परियोजना को 1976 में मंजूरी मिली थी लेकिन 1992 से इसका काम रुका था.

2009 में इस प्रकल्प को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया. जिसमें सिंचाई और पेयजल की लागत का 90% हिस्सा केंद्र और 10% बेसिन राज्य देंगे. गडकरी ने कहा कि लखवाड़ परियोजना की कुल लागत 3966 करोड़ रुपये है.

महत्वपूर्ण यह है इन छः राज्यों को जब पानी की जरूरत होगी, तब उन्हें आपूर्ति दी जाएगी. इससे गर्मियों में इन राज्यों की पानी की समस्या दूर होगी. इसमें पावर पर 1388.28 करोड़ रुपए होगा, जो उत्तराखंड सरकार वहन करेगी।

इसलिए प्रोजेक्ट के कुल पावर जेनरेशन का लाभ भी उत्तराखंड सरकार को ही मिलेगा। इस प्रोजेक्‍ट से 300 मेगावाट बिजली मिलेगी। शेष 2579.23 करोड़ रुपए सिंचाई और पीने के पानी पर खर्च होंगे।

गडकरी ने कहा कि देहरादून से 90 किमी दूर एक गांव के पास बनने वाले इस बांध से यमुना के पानी का प्रबंधन सही ढ़ंग से किया जाएगा, ताकि इन 6 राज्‍यों में गर्मियों के सीजन में (दिसंबर से मई-जून) पीने का पानी उपलब्‍ध होगा। साथ ही, बांध से बनने वाली बिजली उत्‍तराखंड को दी जाएगी।

सबसे पहले यह बांध बनाने की योजना साल 1976 में बनाई गई थी, लेकिन काम बेहद धीमी गति से चलता रहा। पर 1992 में पूरी तरह काम रुक गया।

जब दिल्‍ली, हरियाणा, उत्‍तर प्रदेश में पानी की कमी महसूस की गई तो फिर से इस प्रोजेक्‍ट की याद 2009 में आई और इस प्रोजेक्‍ट को नेशनल प्रोजेक्‍ट घोषित करते हुए दावा किया गया कि यह प्रोजेक्‍ट जल्‍द ही दोबारा शुरू किया जाएगा। परंतु राज्‍यों के बीच सहमति न बनने और पर्यावरणविदों के विरोध के चलते यह प्रोजेक्‍ट सिरे नहीं चढ़ पाया।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि इस समझौते के बाद कई राज्यों की जनता को फायदा होगा, उन्होंने कहा कि यमुना में कई माह तक पानी नहीं होता है, लेकिन जब इस बांध निर्माण का कार्य पूरा हो जाएगा तो इससे छह राज्यों को फायदा होगा, साथ ही पानी का फीसदी भी बढ़ जाएगा और पीने की पानी का संकट भी दूर हो जाएगा.

लखवाड़ परियोजना के तहत उत्‍तराखंड में देहरादून जिले के लोहारी गांव के पास यमुना नदी पर 204 मीटर ऊंचा कांक्रीट का बांध बनाया जाना है. बांध की जल संग्रहण क्षमता 330.66 एमसीएम होगी. इससे 33,780 हेक्‍टेयर भूमि की सिंचाई की जा सकेगी. इसके अलावा इससे यमुना बेसिन क्षेत्र वाले छह राज्‍यों में घरेलू तथा औद्योगिक इस्‍तेमाल और पीने के लिए 78.83 एमसीएम पानी उपलब्‍ध कराया जा सकेगा. परियोजना से 300 मेगावाट बिजली का उत्‍पादन होगा. परियोजना निर्माण का काम उत्‍तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड करेगा. मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार, परियोजना पर आने वाले कुल 3966.51 करोड़ रुपये की लागत में से बिजली उत्‍पादन पर होने वाले 1388.28 करोड़ का खर्च उत्‍तराखंड सरकार वहन करेगी.  परियोजना पूरी हो जाने के बाद तैयार बिजली का पूरा फायदा भी उत्‍तराखंड को ही मिलेगा. परियोजना से जुड़े सिंचाई और पीने के पानी की व्‍यवस्‍था वाले हिस्‍से के कुल 2578.23 करोड़ के खर्च का 90 प्रतिशत (2320.41 करोड़ रुपये) केन्‍द्र सरकार वहन करेगी जबकि बाकी 10 प्रतिशत का खर्च छह राज्‍यों के बीच बांट दिया जाएगा. इसमें हरियाणा को 123.29 करोड़ रुपये, उत्‍तर प्रदेश और उत्‍तराखंड में से प्रत्‍येक राज्‍य को 86.75 करोड़ रुपये, राजस्‍थान को 24.08 करोड़ रुपये, दिल्‍ली को 15.58 करोड़ रुपये तथा हिमाचल प्रदेश को 8.13 करोड़ रुपये देने होंगे.

लखवाड़ परियोजना के तहत संग्रहित जल का बंटवारा यमुना के बेसिन क्षेत्र वाले छह राज्‍यों के बीच 12 मई 1994 को किये गये समझौता ज्ञापन की व्‍यवस्‍थाओं के अनुरूप होगा. लखवाड़ बांध जलाशय का नियमन यूवाईआरबी के जरिए किया जाएगा. लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना के अलावा ऊपरी यमुना क्षेत्र में किसाऊ और रेणुकाजी परियोजनाओं का निर्माण भी होना है. किसाऊ परियोजना के तहत यमुना की सहायक नदी टौंस पर देहरादून जिले में 236 मीटर ऊंचा कांक्रीट का बांध बनाया जाएगा. वहीं रेणुकाजी परियोजना के तहत यमुना की सहायक नदी गिरि पर हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में 148 मीटर ऊंचे बांध का निर्माण किया जाएगा.

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