भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग की तारीख का ऐलान कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त के मौके पर गगनयान मिशन के बारे में ऐलान किया था. रिपोर्ट के मुताबिक, इसरो चेयरमैन के. सिवन ने कहा है कि उन्हें विश्वास है कि प्रधानमंत्री के तय समय में वे इंसान को अंतरिक्ष में भेज पाएंगे.

इसरो के चेयरमैन के सिवन ने मंगलवार को बताया कि इसे 3 जनवरी को लॉन्च किया जाएगा। यह 16 फरवरी को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के नजदीक तय स्थान पर उतर जाएगा। इसके अलावा भारत 2022 में अंतरिक्ष में मानव मिशन गगनयान भी भेजेगा। सिवन ने बताया कि चंद्रयान-2 का वजन 600 किलोग्राम बढ़ाया गया है।

Isro will launch chandrayaan2 on 3rd January  2019 India will create a history

दरअसल, प्रयोगों के दौरान पता चला कि उपग्रह से जब चंद्रमा पर उतरने वाला हिस्सा बाहर आएगा तो यह हिलने लगेगा। लिहाजा, इसका भार बढ़ाने का फैसला किया गया। अब यह उपग्रह समेत 38 क्विंटल से कुछ ज्यादा होगा। भार बढ़ने की वजह से अब इसे जीएसएलवी से लॉन्च नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए जीएसएलवी-मैक-3 में बदलाव किया गया है। यह जीएसएलवी-मैक-3-एम1 कहलाएगा। चंद्रयान-2 पहले इसी साल अक्टूबर में लॉन्च करने की योजना थी। सिवन ने बताया कि यह दुनिया का पहला मिशन होगा, जो चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के नजदीक पहुंचेगा।

इसरो की मार्च 2019 से पहले तक 19 मिशन लॉन्च करने की योजना है। 

इसरो ने भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान का खाका भी तैयार कर लिया है। इसके जरिए तीन अंतरिक्ष यात्री 350 से 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर अंतरिक्ष यान में बैठकर पृथ्वी का चक्कर लगाएंगे। वे बेहद कम गुरुत्वाकर्षण से जुड़े प्रयोग करेंगे। यह मिशन दिसंबर 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इससे पहले यह प्रयोग दो बार मानवरहित किया जाएगा। के. सिवन के मुताबिक ऑर्बिटल मॉड्यूल के दो हिस्से होंगे। एक-क्रू मॉड्यूल, दूसरा-सर्विस मॉड्यूल। क्रू मॉड्यूल 3.7 मीटर व्यास में एक सर्कुलर क्यूबिकल जैसा होगा, जिसकी ऊंचाई 7 मीटर और वजन 7 टन होगा। इसी मॉड्यूल में तीनों अंतरिक्ष यात्री रहेंगे।

सर्विस मॉड्यूल में तापमान और दबाव को बनाए रखने वाले उपकरण, लाइफ सपोर्ट सिस्टम, ऑक्सीजन और खाने-पीने का सामान होगा।

लौटते समय स्पेसक्राफ्ट की गति को धीरे-धीरे कम किया जाएगा और पृथ्वी से 120 किलोमीटर की दूरी पर क्रू मॉड्यूल सर्विस मॉड्यूल से अलग हो जाएगा। क्रू मॉड्यूल से यात्री पैराशूट के जरिए गुजरात के पास अरब सागर में उतरेंगे। यदि कोई परेशानी हुई तो बंगाल की खाड़ी में उतरने का विकल्प होगा। इसके अलावा क्रू मॉड्यूल को सीधे रिसीव करने की भी सुविधा होगी। स्पेसक्राफ्ट की तकनीक, लांचिंग वगैरह पहले जैसी ही है। एक बात जो सबसे नई है, वह है इसमें इंसानों की मौजूदगी।

गगनयान से भेजे जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को करीब तीन साल प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इसे ध्यान में रखते हुए इनका चयन भी जल्द होगा। इसमें एयरफोर्स के पायलटों को प्राथमिकता दी जाएगी। अंतरिक्ष में पांच-सात दिन रहने के बाद अंतरिक्ष यात्री धरती पर लौटेंगे। यान को तय कक्षा में पहुंचने में 16 मिनट और धरती पर वापस आने में 36 मिनट लगेंगे। गगनयान पर करीब 10 हजार करोड़ रुपए का खर्च आएगा। यह किसी भी अंतरराष्ट्रीय मानव मिशन की तुलना में काफी कम होगा।

इसरो अगले साल के मध्य तक एसएसएलवी नाम से एक नया प्रक्षेपण यान बना लेगा। सिवन ने बताया कि छह लोगों की मदद से सिर्फ तीन दिन में असेंबल किया जा सकेगा। अभी जीएसएलवी और पीएसएलवी को असेंबल करने में 600 लोग और 60 दिन लगते हैं। एसएसएलवी से कम वक्त में लॉन्चिंग की तैयारी की जा सकेगी।
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