किसी जीवित या मृत व्यक्ति के शरीर का ऊतक या कोई अंग दान करना “अंगदान” (Organ donation) कहलाता है। यह ऊतक या अंग किसी दूसरे जीवित व्यक्ति के शरीर में प्रत्यारोपित (ट्रान्सप्लान्ट) किया जाता है। इस कार्य के लिये दाता के शरीर से दान किये हुए अंग को शल्यक्रिया द्वारा निकाला जाता है।

सामान्य स्वास्थ्य वाला कोई भी व्यक्ति अपने अंगों को दान कर सकता है।

अंगदान किसी के भी जीवन को बचा सकता है, लेकिन भारत में लोगों के बीच गलत धारणा और ज्ञान की कमी होने के कारण अंगदान का प्रतिशत उतना अधिक नहीं है, जितना कि इसे होना चाहिए। अंगदान करने वालो की कमी होने के कारण अंग प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा करने वाले सैकड़ों लोग मर रहे हैं।

हाल ही में हुए एक अध्ययन से पता चलता है कि भारत में हर साल अंग विफलता (अंगों का कार्य न करना) और अंगों की उपलब्धता की कमी के कारण 5 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। अंगदान दिवस विभिन्न लोगों, सरकारी संगठनों, गैर-सरकारी संगठनों और कई अन्य संगठनों द्वारा मनाया जाता है, जो अंगदान और इसके मूल्य के बारे में लोगों को जागरूक करने तथा लोगों को अपने अंगों को दान करने के प्रेरित करते हैं।

एक दाता आठ लोगों की जिंदगिया बचा सकता है।

  • सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौत के मामलो में नियम के अनुसार, केवल उन्हीं के अंग निकाले जा सकते हैं, जिनकी मृत्यु अस्पताल में होती है। जिसके परिणामस्वरूप मौके पर मरने वाले व्यक्ति के परिजन अंगों को दान करने में असमर्थ हैं।
  • बहुत से लोग अपने जीवनकाल में अपने अंगों को दान करने की इच्छा ही नहीं करते हैं।
  • बहुत से लोग अपने जीवनकाल में अपने अंगों को दान करने की इच्छा तो रखते है किन्तु उन्हें ज्ञान ही नहीं है की उन्हें करना क्या होगा|
  • बहुत-से लोग चाहते हैं और सोच भी रखते हैं कि अंगदान करेंगे, लेकिन इस बारे में ऑन रिकॉर्ड कुछ नहीं होता और न ही वे अपने परिवारवालों को बताते हैं जिसके कारण चाह मन में ही रह जाती है.
  • धार्मिक मान्यताओं के प्रति विश्वास और गलत धारणाएं भी व्यक्तियों को अंगदान करने से बाधित करती हैं।

दाताओं के शरीर से निकाले गए अधिकांश अंगो को 6 से 72 घंटों के अन्दर ही प्रतिस्थापित कर देना चाहिए। जबकि कॉर्निया, त्वचा, हृदय के वाल्व, हड्डी, टेडन, अस्थि-बंधन और कार्टिलेज जैसे ऊतकों को बाद में उपयोग के लिए संरक्षित और संग्रहित किया जा सकता है। 

One organ and tissue donor can help transform the lives of more than 8 people. Organ transplantation is a medical procedure in which an organ is removed from one body and placed in the body of a recipient, to replace a damaged or missing organ.

यदि आप अंगदान करना चाहते है तो आवश्यक है की कुछ बातो का ध्यान रखा जाए| मृत्यु के पश्‍चात् परिवार के सदस्य द्वारा संबंधित संस्था या अस्पताल से संपर्क किए जाने के बाद बॉडी को कलेक्ट कर लिया जाएगा.  देहदान की इच्छा आप वसीयत में भी कर सकते हैं, यह क़ानून द्वारा मान्य है. बॉडी डोनेशन जल्द से जल्द कर देना चाहिए. बॉडी ख़राब न हो इसलिए उसे रेफ्रिजरेटेड कॉफिन्स में प्रिज़र्व किया जाना चाहिए.

शरीर को तरह-तरह के परीक्षण व जांच के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे नई मशीनों, शोधों व सर्जरीज़ को ईजाद करने व इलाज को बेहतर करने की दिशा में मदद मिल सकती है. ऑपरेशन थिएटर में मल्टीपल ऑर्गन रिकवरी से अंगों को निकालकर स्पेशल सॉल्यूशन्स और कोल्ड पैकिंग के ज़रिए उन्हें प्रिज़र्व किया जाता है. डोनर के शरीर को वेंटिलेटर से हटाकर सर्जिकली क्लोज़ करके परिजनों को सौंप दिया जाता है. ध्यान रहे कि बॉडी को रिजेक्ट भी किया जा सकता है. अगर बॉडी बहुत अधिक डीकंपोज़ हो गई हो, किसी बड़ी सर्जरी से गुज़री हो, शरीर क्षत-विक्षत हो गया हो (अगर एक्सीडेंट से मृत्यु हुई हो), तो बॉडी लेने से इंकार किया जा सकता है.

अंगदान की प्रक्रिया

  • अपने जीवनकाल में कोई भी व्यक्ति अपने अंगों को दान करने की प्रतिज्ञा कर सकता है। इसके लिए उनको दाता कार्ड प्रदान किया जाता है। अंग को दान करते समय व्यक्ति के पास दाता कार्ड होना और अपने नजदीकी परिजनों को सूचित करना अनिवार्य है।
  • मृत मस्तिष्क वाले मरीजों के मामले में, अंगों के दान करने के लिए अनुसरण किए जाने वाले नियमों के साथ-साथ मानव अंगों के प्रत्यारोपण अधिनियम की स्थापना की गई है। इस अधिनियम में निर्धारित प्रक्रियाओं के अतिरिक्त, कानूनी अधिकारी को अंगों को निकालने से पूर्व परिवार से सहमति तथा कोरोनर की आवश्यकता होती है। हालांकि कानूनी औपचारिकताओं वाली प्रक्रिया में मरीज को वेंटिलेटर पर जीवित रखा जाता है।
  • मृतक के सबसे खास परिजन उसके अंगों को दान कर सकते हैं।
  • कोई भी व्यक्ति चाहे किसी भी उम्र का हो, बॉडी और टिश्यूज़ डोनेट कर सकता है. बेहतर होगा आप ख़ुद से यह न सोचें कि मैं अभी बहुत यंग या ओल्ड हूं, डोनेट करने के लिए. कुछ अंगों व टिश्यूज़ की कोई उम्र सीमा नहीं होती डोनेट करने की.
  • मृत व्यक्ति के ऑर्गन्स फिट हैं या नहीं यह इस बात पर निर्भर करता है की व्यक्ति की मौत किस तरह से हुई और उसकी मेडिकल हिस्ट्री क्या रही है
  • सामान्य स्वास्थ्य वाला कोई भी व्यक्ति अपने अंगों को दान कर सकता है। इसके लिए कुछ ख़ास आयु की कोई सीमा नहीं है
  • ऑर्गन/टिश्यू डोनेशन का रजिस्ट्रेशन: रजिस्ट्रेशन के लिए आपको फॉर्म भरना होगा. यह फॉर्म एनजीओ से भी प्राप्त किया जा सकता है.
  • आप भारत सरकार की साइट नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइज़ेशन- notto.nic.in पर जाकर भी फॉर्म भर सकते हैं.
  • स्मार्टफोन्स के ज़रिए भी ऐप्स डाउनलोड करके रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं.
  • बॉडी डोनेट करने के लिए ऐप्लीकेशन फॉर्म किसी भी मान्यता प्राप्त कॉलेज के एनाटॉमी विभाग से प्राप्त किया जा सकता है. ये फॉर्म अन्य कहीं से भी प्राप्त नहीं किया जा सकता.
  • आपको फॉर्म भरना होगा. फॉर्म पर दिए निर्देशों का पालन करें और जो भी ज़रूरी काग़ज़ात लगें उन्हें संलग्न करें.
  • पेपर वर्क पूरा होने के बाद आपको डोनर कार्ड मिलेगा, उस कार्ड को हमेशा संभालकर अपने साथ रखें.
  • ध्यान रहे कि यह कार्ड लीगल डॉक्यूमेंट नहीं होता, बल्कि इससे आपकी अंगदान/देहदान की इच्छा की पुष्टि होती है. अंतिम निर्णय आपके पारिवारिक सदस्यों के हाथों में ही होगा.

जीवित रहते हुए दान किए जाने वाले अंग

  • यकृत - यकृत में पुनः निर्माण की क्षमता होती है, इस प्रकार यदि यकृत का एक हिस्सा दान कर दिया जाए, तो वह फिर से वृद्धि या उसी स्थित को वापस प्राप्त कर लेता है।
  • गुर्दा - मनुष्य एक गुर्दे से भी जीवित रह सकता है, इसलिए दूसरे गुर्दे को दान किया जा सकता है।
  • फेफड़े - फेफड़े के एक भाग को दान किया जा सकता है। परन्तु फेफड़ों में पुनः निर्माण की क्षमता नहीं होती है।
  • अग्न्याशय - इसकी क्रियाशीलता को ध्यान में रखते हुए, अग्न्याशय का एक भाग दान किया जा सकता है
  • आँत - दुर्लभ मामलों में दाताओं के द्वारा आँत का एक हिस्सा दान किया जा सकता है।

मृत व्यक्ति के दान किए जाने वाले अंग

  • गुर्दा - एक प्रत्यारोपित गुर्दे के काम करने का समय लगभल नौ साल होता है।
  • यकृत - एक व्यक्ति से निकालने पर दो व्यक्तियों में प्रत्यारोपित किया जा सकता है। अतः एक यकृत का 2 व्यक्ति लाभ उठा सकते हैं।
  • हृदय
  • फेफड़े – दोनों फेफड़ों को प्रत्यारोपित किया जा सकता है।
  • अग्न्याशय
  • आँत
  • रक्त वाहिनी
  • रक्त और प्लेटलेट्स
  • ऊतक - मौत के 24 घंटों के अन्दर इन्हें दान किया जा सकता है।
  • कॉर्निया (नेत्रपटल)– कॉर्निया को मृत्यु के 24 घंटों के अन्दर दान किया जा सकता है। यह माना जाता है कि एक मृत व्यक्ति की कॉर्निया दो अंधे लोगों के जीवन में उजाला कर सकती है।
  • हड्डियाँ
  • त्वचा
  • नसें
  • टेंडन
  • स्नायुबंधन (अस्थि-बंधन)
  • हृदय के वाल्व
  • कार्टिलेज (नरम हड्डी)

कैंसर और एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति तथा सेप्सिस (सड़ने वाले घाव) या इंट्रावेनस (IV) दवाओं का इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति सक्रिय संक्रमण के कारण, अंगों को दान नहीं कर सकते हैं।

भारत मे कुछ जाने पहचाने संगठन जिनमे अंगदान के लिए सम्पर्क किया जा सकता है

  • मोहन फाउंडेशन
  • गिफ्ट योर ऑर्गन फाउंडेशन
  • शतायु
  • उपहार एक जीवन

हम अक्सर देखते हैं कि कोई महिला अपने प्रिय के लिए अंगदान करने को तैयार हो जाती है. किडनी ट्रांसप्लांट में तो ये आम बात है. किडनी दान करने वालों में 60 फ़ीसदी महिलाएं होती हैं. दूसरे देशों में भी गुर्दे दान करने वाले महिलाओं का अनुपात पुरुषों से कही अधिक रहता है.

महिलाएं, आज पुरुषों की तुलना में ज़्यादा अंगदान कर रही हैं और अब तो पूरी दुनिया में अंगदान करने वाले पुरुषों की संख्या और भी कम हो रही है

ख़ास बात ये है की औरतों से अंगदान लेने वाले 59 फ़ीसदी मरीज़ पुरुष होते हैं.

आम तौर पर महिलाओं के अंग, मर्दों के मुक़ाबले छोटे होते हैं. अंगों के आकार के अलावा, पुरुषों और महिलाओं के शरीर में बीमारी से लड़ने वाले एंटीजेन भी अलग-अलग होते हैं. हालांकि साइंस की तरक़्क़ी से इस मेडिकल चुनौती पर काफ़ी हद तक क़ाबू पा लिया गया है.

अंगों के सुरक्षित रहने की समयावधि

  • हार्ट: 4-6 घंटे
  • लंग्स: 4-8 घंटे
  • इंटेस्टाइन: 6-10 घंटे
  • लिवर: 12-15 घंटे
  • पैंक्रियाज़: 12-24 घंटे
  • किडनी: 24-48 घंटे

आज का समय मिथ्यक और कहानियों को भूलकर, विज्ञान पर विश्वास करने और संकट-ग्रस्त लोगों की मदद करने का है। यह महसूस करने का समय है कि हम अपनी मौत के बाद भी किसी की मदद कर सकते हैं। यह हमारे अंगों को दान करने की प्रतिज्ञा करने का समय है। कहा जा सकता है कि अंगों की आवश्यकता स्वर्ग में नहीं, धरती पर है, तो क्यों इन्हें जलाया या ख़ाक़ में मिलाया जाए, क्यों न इन्हें डोनेट करें.

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